Your kingdom come / तेरा राज्य आए

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Description

संक्षिप्त विवरण:

प्रभु की प्रार्थना का प्रारम्भ परमेश्वर को पिता के रूप में सम्बोधित करने से होता है, जिससे प्रार्थी में एक व्यक्तिगत सम्बन्धों की भावना जागृत होती है। परन्तु फिर भी आदर व सम्मान जो परमेश्वर के लिए होना चाहिए, वह किसी भी तरह हल्का नहीं होता_ क्योंकि वह राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु है, और अति महान है।

यीशु ने प्रतिभोर प्रार्थना करके प्रार्थना के महत्व व प्राथमिकता को उजागर किया। उन्होंने हर अवसर व हर चीज के लिए प्रार्थना करके, हमें सिखाया कि हमारी इच्छाओं का आधार प्रार्थना द्वारा परमेश्वर की इच्छा पर होना चाहिए। और प्रार्थना सुन लिए जाने पर धन्यवाद करना भी सिखाया।

जो प्रार्थना करना सीख रहे हैं उन्हें पवित्र आत्मा की सहायता मिलना अति आवश्यक है कि वे अर्थपूर्ण प्रार्थना कर सकें। प्रभु यीशु ने जब प्रार्थना करना सिखाया तो यह भी कहा कि पिता से पवित्र आत्मा माँगोगे तो वह क्यों न देगा। मुझे विश्वास है कि ‘तेरा राज्य आए’ नामक यह पुस्तक हमारा परमेश्वर के बीच सम्बन्ध को बढ़ाने में आपकी मदद करेगी। और आप प्रार्थना के महत्व को और गहराई से जान पाएंगे जिस तरह मैंने अपने जीवन में जाना है। प्रभु इस पुस्तक के द्वारा आपको आशीषित करे।

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